इश्क.. इश्क..!!! भाग १
इश्क.. इश्क..!!!
भाग १
समता नगर पार्क स्थित क्रॉसवर्ड के बाहर एक ‘मिडनाईट-ब्लॅक’ कलर की फोर्ड-ईको-स्पोर्ट कार आकर रुक गयी। दरवाजा खोलकर तीस साल का एक युवक उसमें से बाहर आया। एक काले रंग की साटन शर्ट जो कार के रंग से मेल खाती हो, ग्रे कलर की स्पोर्ट्स जैकेट, पैरों में क्रॉकोडाइल शूज, छोटी सी फ्रेम का चंदेरी चश्मा, और जेल लगाकर उसने अपने बालों को पीछे की ओर अच्छे से संवारा था। दरवाजे पर ही खड़े एक लड़के को उसने अपनी कार की चाबी दी और वो क्रॉसवर्ड के एक कोने में जा घुसा।
केवल ८ - १० लोगों को कोने में जमा देख उस युवक के चेहरे पर की मुस्कान थोड़ी फीकी पड़ गई। उसे देखते ही एक युवक आयोजक टाइप गले में बड़ा पहचान पत्र और कानों में ब्लू टूथ हेडसेट लिए दरवाजे की ओर दौड़ा।
“वेलकम कबीर सर.. प्लिज वेलकम..”, आयोजक ने युवक से हाथ मिलाते हुए कहा।
"जीत.. क्या है यह..? सिर्फ इतने ही लोग..?" कबीर ने थोड़े नाराज़ स्वर में कहा।
जय भट उर्फ़ कबीर, हाल ही में एक नव नामित लेखक। साल भर के दौरान प्रकाशित उनकी पहली दो पुस्तकें सुपरहिट रहीं। उन्होंने क्राईम की कहानियों में उभरते सितारे के रूप में मेहता पब्लिकेशन का प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता था। पहिली बैंक रॉबरी और दूसरी किडनैपिंग के आधारवाली उनकी पुस्तकें हातोहात ख़तम हो गयी थी। बहुतों ने एक ही बैठक में उन पुस्तकों को पढ़ लिया था। अंतिम क्षण तक रहस्य बनाये रखनेवाली उनकी कहानियाँ कौतूहल का विषय थीं। उनकी तीसरी किताब उतनी मशहूर नहीं हुई जितनी होनी चाहिए थी। और आज कबीर की चौथी पुस्तक प्रकाशित हो रही थी।
लेकिन प्रकाशन के लिए केवल ८ - १० लोगों को इकट्ठा होते देख कबीर कुछ निराश हुआ।
"जित.. इतने ही लोग..?", कबीर।
“आय एम सॉरी सर.. अॅड्व्हरटाईज तो अच्छे से किया था, लेकिन… आ जाएंगे सर,.. और भी लोग आएंगे..”, जित ने कहा।
“एनीबडी फ्रॉम मिडीय़ा?”, कबीर।
"नो र..", जीत ने गर्दन निचे करते हुए फुसफुसाया।
“ओके..! व्हेअर ईज रवि..?”, कबीरने पूछा।
"सर वो आ रहा है, वो सेकंड फ्लोर पर है, मैंने उन्हें बता दिया है कि आप आ गए है...", जीत ने कहा।
“वेल देन.. शुड वुई प्रोसीड?”, कबीर जैकेट के बटन ठीक करते हुये बोला।
“वन सेकंद सर..”, इतना कहकर जित ने किसी को फ़ोन लगाया और कहा, "कबीर इज मेकींग एन्ट्री, स्पॉटलाईट अॅन्ड क्लॅपींग्ज प्लिज…”
जित दो सेकेंड के लिए रुके और कबीर को चलने का इशारा किया। उसी समय कबीर पर एक बड़ी स्पॉटलाईट आयी और स्थिर हो गई। इसके बाद, स्टेज पर खड़ी नीली साड़ी पहने एक युवती ने एनाउंसमेंट की और फिर कबीर ने कुछ तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मंच पर कदम रखा।
सामने वाले दर्शकों में कुछ खास उत्साह नहीं था। पहली पंक्ति में शायद दो या चार खाली पेंशनभोगी थे। उन्हें देखकर कबीर चौंक गया। पिछले प्रकाशन के समय ऐसे ही एक बूढ़े व्यक्ति ने कबीर की पुस्तक में अनावश्यक अश्लीलता के बारे में उसे चार बोल सुना दिये थे। और इस बार भी कबीर ने इससे कुछ सीखे बिना ही सामान्य गरमागरम मुद्दों को भी इस किताब में डाल दिया था। एक महिला जिसके माथे पर बड़ा कुमकुम है, दो तिस साल के युवक और ५ से ६ कॉलेज के लड़के और लड़कियां.. बस.. इतने ही वहाँ मौजूद थे।
“थॅंक्यु माय फ्रेंड्स…”, कबीर ने माइक लेते हुए कहा, "मुझे पता है, मुझे आने में थोड़ी देर हो गई है .. मुझे इसके लिए खेद है। मुझे आशा है की आपने जैसे मेरी पिछली तीन पुस्तकों को भरभर के अभिप्राय दिए उसी प्रकार मेरी इस चौथी पुस्तक को भी देंगे। 'रोड ट्रिप' पर आधारित यह मेरी चौथी किताब है। एक कपल अपनी अॅनीव्हर्सरी के लिये रोड ट्रिप पर जाता है और फिर रास्ते में कुछ घटनायें घटित होती है। मर्डर, किडनॅपींग, रोमैंस सब कुछ इस नयी क़िताब में है ही......"
कबीर जब खुलकर अपनी किताब की तारीफ कर रहा था, तभी उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया।
कबीर ने एसएमएस खोला, वह रवि का ही था........
"कबीर.. ज्यादा बात मत करो, जो लोग इकट्ठे हैं वो भी चले जायेगें.. यह सब निपटाकर जल्दी ऊपर आओ, मेहता साहब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं"
कबीर ने ऊपर देखा, और दूसरी मंजिल पर बरामदे पर, पुराने ज़माने के अजय-देवगन जैसे हेअर-स्टाईल के साथ, एकदम गोरा चिठ्ठा रवि खड़ा था।
रोहन.. कहो तो कबीर का आजीवन दोस्त, या फिर कहो कबीर का मैनेजर। कबीर के पब्लीकेशन्स, उसके मीटिंग्स, मिडीआ-कनेश्कन्स सब कुछ वो ही संभालता था।
उसने कबीर को जल्दी से ऊपर आने का इशारा किया और वह चला गया।
“फ्रेंड्स, इस किताब पर सिर्फ आज के लिए ३०% की छूट है, इसके अलावा, मैं यहाँ आधा घंटा रुक रहा हूँ, जो कोई भी पुस्तक खरीदेगा उसे मेरी हस्ताक्षरित प्रति प्राप्त होगी... सो गाईज.. हिअर वुई गो…”
नीले रंग की साड़ी में उस दूसरे आयोजक युवती ने कबीर को मरून रंग के वेस्टन में लिपटी एक किताब सौंपी। कबीर ने ध्यान से वेस्टन खोला और अपनी पुस्तक को हाथ ऊपर कर के ऊंचा पकडे रखा।
सिर्फ पैसों के लिए आयोजकों ने जोर-जोर से तालियां बजाईं, लेकिन कुछ सम्मानित दर्शकों को छोड़कर किसी ने ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया।
प्रकाशन समाप्त करने के बाद, कबीर स्टेजपर से निचे उतर कर कोने में रखे मेज पर बैठ गया।
जित मेज के नज़दीक आया और कबीर के कान में फुसफुसाया, “सर बुक-रिडींग करनेवाले थे न आप..? आय मीन किताब की कुछ पन्ने आप पढ़नेवाले थे ऐसा रवि ने बताया था, और वैसा ही लोगों को भी बताया गया था..!"
“लुक अराऊंड जित.. किसी को भी इंट्रेस्ट नहीं है, आधे लोग उठकर चले गये भी, लेट्स कॅन्सल इट..”, कबीर ने कहा।
"ओके सर..." इतना कहकर जित वहाँ से निकल गया।
कबीर ने भीड़ में केवल दो युवतियों को देखा (!) एक किताब खरीदते हुए। वो दोनों अपनी बातों में ही मशगूल थीं। बोलते-बोलते उन्होनें किताब कबीर की मेज पर रख दी। कबीर ने कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोला लेकिन उनका उस पर कोई ध्यान नहीं था, वो तो अपनी बातों में ही मशगूल थीं।
कबीर ने चुपचाप किताब पर साइन किया, वैसे वे किताब लेकर चली गयी।
कबीर ने अपना मोबाइल निकाला और रवि को फोन किया।
"हॅलो.. रवि.. क्या बात है यार.. कितना ठंडा रिस्पॉन्स...
सिर्फ एक ही एक किताब बिकी..", कबीर....
"वो सब छोड़ो... तुम पहले ऊपर आओ... मेहता सा'ब इंतज़ार कर रहे है।" रवि....
"अरे लेकिन.. मैंने उनसे कहा था की, मैं अभी उनका ऑफ़र नहीं ले सकता...", कबीर..
"देखो कबीर.. नाराज़ मत हो, पर हमारी तीसरी किताब अच्छी नहीं चली.. और मुझे चौथी से भी ज्यादा उम्मीदें नहीं है..", रवि...
"अरे लेकिन क्यूँ..? पहिली दो किताबें कितना मस्त प्रॉफिट देकर गयी।"
"क्यूँ..?? तुम तुम्हारी किताब किसी तीसरे व्यक्ति की नजरों से पढ़ो, पूरा का पूरा टाईप-कास्ट हो गया है तू, वही मर्डर, वही लड़ाइयाँ, अवसरवादी औरतें, माफिया, कोई गरीब बिचारा परिस्थिति-का-मारा, क्लर्क/मॅनेजर, सब प्रेडीक्टेबल हो गया है रे... अगर यह किताब नहीं बिकी तो... तो तुम्हें पता है क्या..? हमें कितना बड़ा लॉस होगा..??"
"हाँ.. लेकिन वो सब बाद में देखेंगे, फ़िलहाल उस मेहता से छुटकारा पा..."
"देखो कबीर.. आधा घंटा हो गया है, उनके जैसी बड़ी आसामी तुम्हारा इंतज़ार कर रही है, कम से कम उनके मान-सम्मान के लिए तो मिलो।"
"लेकिन यार, मुझे लव्ह-स्टोरी लिखने में कोई दिलचस्पी नहीं है.. यह मेरा जॉनर ही नहीं है.."
"यह सब हम आमने-सामने बैठकर बात क्यों नहीं कर सकते..? तुम पहले ऊपर आओ.." इतना कहकर रवि ने फोन काट दिया।
अब तक सभी लोग जा चुके थे। आयोजकों ने भी बिना ज्यादा धैर्य दिखाए सब कुछ समेटना शुरू कर दिया था। कबीर ने एक गहरी सांस ली और क्रॉसवर्ड के दूसरी मंजिल पर चला गया।
सामने के सोफे पर लगभग ६० की आयु और सुनहरे बालों वाला एक सज्जन बैठा था। रवि उनके बगल में बैठा था।
कबीर को सामने से आते हुये देखते ही वह गृहस्थ, यानी मेहता साहब उठ खड़े हुये।
“वेलकम यंग मॅन.. वेलकम.. ग्रिटींज्स फ्रॉम मेहना-एन-मेहता पब्लीकेश्नस ऑन युअर न्यु बुक..”
“थॅक्स अ लॉट सर…”, कबीर ने उससे हाथ मिलाया और कहा.. "प्लीज़ बैठिये ना सर..."
दोनों सोफे पर बैठ गए।
“कॉफी?”, रवि ने पूछा…
“नो.. थॅंक्स रवि... आओ बैठो..." कबीर ने आगे कहा, "बोलो मेहता सर, क्या काम निकाला..?"
"काम कुछ अलग नहीं है..", अपने कोट के बटन खोलते हुये मेहता सर आराम से बैठकर बोले, "यही की, जिस बारें में हमने पहले भी बात की है..." इतना कहकर उन्होंने अपने कोट की जेब से एक सफेद लिफाफा निकाला और कबीर को दे दिया।
"यह क्या है..?", कबीर ने मेहता से प्रश्नवाचक दृष्टि से पूछा।
“सि इट युअरसेल्फ..”, मेहता...
कबीर ने वह लिफाफा खोला, उसके अंदर जय भट नाम से एक लाख रुपये का चेक था।
“अॅडव्हॅन्स है, बाकी के टर्म्स के बारें में मैंने रवि से बात कर ली है... वो आपको बता देगा..."
"लेकिन सर, लव्ह स्टोरी... मुझसे ना हो पायेगी.. और वह भी मेरी पर्सनल लाईफ.."
"हाँ.. रवि ने मुझे सब कुछ बताया है.. लेकिन मुझे लगता है कि आप निश्चित रूप से लिख सकते हैं। मुझे सचमुच आपकी लिखने की शैली पसंद आयी। मुझे लगता है कि आपको भी एक हिट की जरूरत है।"
"मैंss.. मैं थोड़ा सोचकर बताऊँगा, मेहता सर...", कबीर ने कहा।
"मुझे अभी के अभी कमिटमेंट चाहिए कबीर। मैं बहुत दिन से रुका हुआ हूँ। येस… ऑर नो…”, मेहता ने बिनती के स्वर में कहा..
“टेक ए ब्रेक कबीर.. किसी और गांव में चले जाओ, जहां सिर्फ तुम अकेले होगे, सब से दूर... यहां से.. अपनी पर्सनल प्रॉब्लेम्स से दूर.. क्या पता तुम्हारी लव्ह-स्टोरी तुम्हें वहां मिले... मेहता इज रेडी टु स्पॉन्सर युअर ट्रीप”, रवि ने कहा।
“ओके हिअर इज अ डिल..”, कबीर ने कहा, "आय विल गिव्ह-इट-अ-ट्राय… से ३ हफ़्ते, लेकिन अगर उसमें भी कुछ कंस्ट्रक्टीव्ह नहीं हुआ तो वुई-विल कॅन्सल धिस डिल.. और मैं यह चेक लौटा दूंगा, एक्स्पेट द टुर एक्स्पेन्सेस.. मेहता विल बेअर दोज.. ओके?”,
“डील..”, कुछ देर सोचने के बाद मेहता साहब ने कहा।
“ग्रेट देन… बुक मी ए व्हिला इन माथेरान.. पूरी शांति है वहाँ..”, कबीर ने कहा..
"माथेरान..? अरे तुम्हें लव्ह-स्टोरी लिखनी है, मेडिटेशन पर बुक नहीं...", हँसते हुए मेहता ने कहा, "माथेरान कितना अँधेरे में बसा एक वीरान गाँव है... यु निड टु गो टु सम लाईव्हली प्लेस.. कलरफुल.. फुल्ल ऑफ युथ प्लेस.. यु आर गोईंग टु गोवा.. कल सुबह तक मैं प्लेन टिकिट्स और हॉटेल बुकिंग डिटेल्स रवि को मेल करता हूँ... ओके..?" मेहता सर सोफे पर से उठते हुए बोले।
“थॅंक्यु सो मच सर..”, रवि और कबीर दोनों ने एकसाथ कहा।
“फॉल इन लव्ह यंग मॅन.. अॅन्ड मेक अस फॉल इन लव्ह विथ युअर स्टोरी…”, कबीर के शोल्डर पर अपना हाथ रखते हुये मेहता सर ने कहा और पीछे मुड़कर निकल गये।
“वन लॅक्स?”, कबीर ने अपनी आँखें चौड़ी करते हुये रवि से कहा।
"फ़िर...! मैं तो बता रहा था तुझको... अरे यह तो सिर्फ अॅडव्हान्स है... चल पहले कॉफ़ी पीते है... मैं तुम्हें बाकी की डिटेल्स ब्रीफ करता हूँ.." रवि ने कहा।
दोनों भी क्रॉसवर्ड के कॉफी कॉर्नर की ओर बढ़ चले....
आगे जारी
#नॉन स्टॉप २०२२ (पोस्ट ३)
Punam verma
07-May-2022 09:29 PM
Nice
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pk123
09-May-2022 04:37 PM
thanks
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Abhinav ji
05-May-2022 06:33 AM
Nice
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pk123
05-May-2022 12:56 PM
thanks
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Sachin dev
04-May-2022 10:34 PM
👌
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pk123
05-May-2022 12:56 PM
shukriya
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